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कुछ मुहतसिबों की ख़लवत में कुछ वाइज़ के घर जाती है
کچھ محتسبوں کی خلوت میں کچھ واعظ کے گھر جاتی ہے
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दरबार में अब सतवत-ए-शाही की अलामत
دربار میں اب سطوت شاہی کی علامت
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