आज का शेर
نازکی اس کے لب کی کیا کہیے پنکھڑی اک گلاب کی سی ہے
नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए पंखड़ी एक गुलाब की सी है
— मीर तक़ी मीरचयनित ग़ज़लें
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उर्दू शायरी के उस्तादों के मुंतख़ब अशआर








