आज का शेर
رنجش ہی سہی دل ہی دکھانے کے لیے آ آ پھر سے مجھے چھوڑ کے جانے کے لیے آ
रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ
— अहमद फ़राज़चयनित ग़ज़लें
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उर्दू शायरी के उस्तादों के मुंतख़ब अशआर














