जहां उर्दू अदब ज़िंदा है

अदब ख़ाना उर्दू शायरी, शोअरा और नस्र का एक डिजिटल घर है — उन क़ारेईन के लिए जो अल्फ़ाज़ की गहराई महसूस करते हैं।

उर्दू दुनिया की सबसे मौसीक़ी-भरी ज़बानों में से एक है — सदियों की शायरी, अक़ीदत, दर्द और तड़प से तश्कील पाई हुई। अदब ख़ाना इसलिए क़ायम है ताकि यह अदबी रिवायत वक़्त या जुग़राफ़िये की नज़र न हो जाए। हम क्लासिकी उस्तादों और हम-अस्र आवाज़ों को यकजा करते हैं और उनका कलाम दुनिया भर के क़ारेईन तक, उर्दू रस्मुलख़त और रोमन तर्जुमे दोनों में, पहुंचाते हैं।

؎ شعر میرے بھی ہیں پُر درد مگر میرؔ کے بعدکس کو آتا ہے سخن میں وہ درد و سوز

— میرؔ تقی میرؔ

सब कुछ उर्दू, एक जगह

शायरी का ज़ख़ीरा

ग़ज़ल, नज़्म, क़सीदा, मर्सिया, रुबाई, हम्द और नात की हज़ारों नज़्में — शायर, सिन्फ़ और दौर के लिहाज़ से मुरत्तब। एक क्लिक में उर्दू रस्मुलख़त या रोमन में पढ़ें।

शोअरा के प्रोफ़ाइल

क्लासिकी और जदीद शोअरा के तफ़सीली प्रोफ़ाइल — सवानेह, दौर, तख़ल्लुस और मुकम्मल कलाम। मीरؔ और ग़ालिबؔ से लेकर आज की आवाज़ों तक।

रोज़ाना शेर

हर दिन एक मुंतख़ब शेर से आग़ाज़ करें। हर रोज़ाना शेर उसकी गहराई, ख़ूबसूरती और असर की बिना पर चुना जाता है — आपकी रोज़मर्रा ज़िंदगी में उर्दू शायरी का एक लम्हा।

लाइव लुग़त

नज़्म में किसी भी लफ़्ज़ पर क्लिक करें और फ़ौरी मानी देखें। हमारी बिल्ट-इन उर्दू लुग़त कसीर-उल-अल्फ़ाज़ इबारात और अंग्रेज़ी से उल्टी तलाश भी सपोर्ट करती है — टैब बदलने की ज़रूरत नहीं।

मुहावरे और कहावतें

मुंतख़ब उर्दू मुहावरों और कहावतों के ज़रिए ज़बान की हिकमत दरियाफ़्त करें — मानी, रोमन तर्जुमे और उनकी पस-ए-मंज़र की कहानियों के साथ।

दो-ज़बानी तजुर्बा

अदब ख़ाना दोनों ज़बानें रवानी से बोलता है। किसी भी वक़्त अंग्रेज़ी और उर्दू के दरमियान स्विच करें — पूरा प्लेटफ़ॉर्म, नेविगेशन से लेकर नज़्म के मतन तक, फ़ौरी और मुकम्मल तौर पर ढल जाता है।

हमारी कहानी

अदब ख़ाना का आग़ाज़ एक सादा सी तकलीफ़ से हुआ: इंटरनेट पर कोई एक, अच्छी तरह से डिज़ाइन की हुई जगह नहीं थी जहां उर्दू शायरी को सही तरीक़े से पढ़ा, दरियाफ़्त किया और सराहा जा सके। ग़ालिबؔ का अज़ीम दीवान, मीरؔ का ख़ाम दर्द, रूमीؔ के उर्दू तर्जुमानों की अक़ीदत की आग — सब बिखरी हुई, बे-तरतीब, या ऐसे इंटरफ़ेस के पीछे छुपी जो ख़ुद अदब की वक़ार से मेल नहीं खाते थे।

हमने यह बदलने का इरादा किया। अदब ख़ाना उन लोगों ने बनाया है जो उर्दू से मोहब्बत करते हैं — न सिर्फ़ एक ज़बान के तौर पर, बल्कि एक ज़िंदा रिवायत के तौर पर। इस प्लेटफ़ॉर्म पर हर डिज़ाइन फ़ैसला, हर फ़ीचर, हर एहतियात से रखा गया लफ़्ज़ उस शायरी के लिए गहरे एहतराम की अक्कासी करता है जो यह अपने अंदर रखता है।

यह महज़ एक आर्काइव नहीं है। यह एक इज्तिमागाह है — एक अदब ख़ाना, लफ़्ज़ के हक़ीक़ी मानों में।

؎ آتے ہیں غیب سے یہ مضامیں خیال میںغالبؔ صریرِ خامہ نوائے سروش ہے

— مرزا غالبؔ

“These themes come to mind from the unseen — Ghalib, the scratching of the pen is the voice of the divine.”

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