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चाहत

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ग़ज़ल3
खुली आँखों में सपना झाँकता है
کھلی آنکھوں میں سپنا جھانکتا ہے
भीड़ में इक अजनबी का सामना अच्छा लगा
بھیڑ میں اک اجنبی کا سامنا اچھا لگا
तुम्हें भी चाहिए है कुछ तो पास चाहत का
تمہیں بھی چاہیے ہے کچھ تو پاس چاہت کا
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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