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हुस्न-ओ-इश्क़ का रिश्ता
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हाँ वही इश्क़-ओ-मोहब्बत की जला होती है
ہاں وہی عشق و محبت کی جلا ہوتی ہے
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चमन में गुल ने जो कल दावा-ए-जमाल किया
چمن میں گل نے جو کل دعوی جمال کیا
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जब तक मिरी निगाह में तेरा जमाल है
جب تک مری نگاہ میں تیرا جمال ہے
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हुस्न-ए-बुतां का इश्क़ मेरी जान हो गया
حسن بتاں کا عشق مری جان ہو گیا
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हुस्न कब इश्क़ का मम्नूने-वफ़ा होता है
حسن کب عشق کا ممنون وفا ہوتا ہے
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