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तुझी को जो याँ जल्वा फ़रमा न देखा
تجھی کو جو یاں جلوہ فرما نہ دیکھا
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तेरा क़ुर्ब था कि फ़िराक़ था वही तेरी जल्वा-गरी रही
ترا قرب تھا کہ فراق تھا وہی تیری جلوہ گری رہی
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हवा महक उठी रंग-ए-चमन बदलने लगा
ہوا مہک اٹھی رنگ چمن بدلنے لگا
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