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कब मेरा नशीमन अहल-ए-चमन गुलशन में गवारा करते हैं
کب میرا نشیمن اہل چمن گلشن میں گوارا کرتے ہیں
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हम अपने आँसुओं का अफ़साना क्या सुनाएँ
ہم اپنے آنسوؤں کا افسانہ کیا سنائیں
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छोड़ कर घर बार अपना हसरत-ए-दीदार में
چھوڑ کر گھر بار اپنا حسرت دیدار میں
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