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हस्ती अपनी हबाब की सी है
ہستی اپنی حباب کی سی ہے
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जब तक मिरी निगाह में तेरा जमाल है
جب تک مری نگاہ میں تیرا جمال ہے
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मेरे रश्क-ए-क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया
میرے رشکِ قمر تو نے پہلی نظر جب نظر سے ملائی مزا آ گیا
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गर कुछ हो दर्द आईना यूं चर्ख़-ए-ज़िश्त में
گر کچھ ہو درد آئینہ یوں چرخ زشت میں
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शैख़ जी आओ मुसल्ला गिरवी जाम करो
شیخ جی آؤ مصلیٰ گرو جام کرو
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