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दिल जो ज़ेर-ए-ग़ुबार अक्सर था
دل جو زیر غبار اکثر تھا
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इश्क़-ए-सनम नमाज़ है है यही ज़िंदगी मिरी
عشق صنم نماز ہے ہے یہی زندگی مری
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अब मीरؔ जी तो अच्छे ज़िंदीक़ ही बन बैठे
اب میرؔ جی تو اچھے زندیق ہی بن بیٹھے
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शाम हुई है यार आए हैं यारों के हम-राह चलें
شام ہوئی ہے یار آئے ہیں یاروں کے ہم راہ چلیں
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