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यादें

सभी 45अशआर 0ग़ज़ल 45
ग़ज़ल45
वो दुश्मन-ए-जाँ जाँ से प्यारा भी कभी था
وہ دشمن جاں جان سے پیارا بھی کبھی تھا
शब था नालाँ अज़ीज़ कोई था
شب تھا نالاں عزیز کوئی تھا
कभी कभी तो बहुत याद आने लगते हो
کبھی کبھی تو بہت یاد آنے لگتے ہو
कान लगा कर सुनती रातें बातें करते दिन
کان لگا کر سنتی راتیں باتیں کرتے دن
शाम आई तिरी यादों के सितारे निकले
شام آئی تری یادوں کے ستارے نکلے
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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