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वो दुश्मन-ए-जाँ जाँ से प्यारा भी कभी था
وہ دشمن جاں جان سے پیارا بھی کبھی تھا
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शब था नालाँ अज़ीज़ कोई था
شب تھا نالاں عزیز کوئی تھا
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कभी कभी तो बहुत याद आने लगते हो
کبھی کبھی تو بہت یاد آنے لگتے ہو
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कान लगा कर सुनती रातें बातें करते दिन
کان لگا کر سنتی راتیں باتیں کرتے دن
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शाम आई तिरी यादों के सितारे निकले
شام آئی تری یادوں کے ستارے نکلے
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