Main Aur Bazm-e-Mai Se Yun Tishna-Kaam Aaun
میں اور بزم مے سے یوں تشنہ کام آؤں
मैं और बज़्म-ए-मय से यूँ तिश्ना-काम आऊँ
ग़ज़ल
१ मिनट पढ़ने मेंمیں اور بزم مے سے یوں تشنہ کام آؤں
گر میں نے کی تھی توبہ ساقی کو کیا ہوا تھا
Main aur bazm-e-mai se yun tishna-kaam aaun
Gar main ne ki thi tauba saqi ko kya hua tha
मैं और बज़्म-ए-मय से यूँ तिश्ना-काम आऊँ
गर मैंने की थी तौबा साक़ी को क्या हुआ था

मिर्ज़ा ग़ालिब1797–1869
शास्त्रीय
मिर्ज़ा ग़ालिब उर्दू के वो अज़ीम और मशहूर शायर हैं, जिन्होंने क्लासिकी और जदीद दौर के बीच एक पुल का काम किया, और जिनके शेर आज भी इंसानी ज़िन्दगी के हर पहलू को बयान करते हैं।
पूरी प्रोफ़ाइल देखें →


तब्सिरे
तब्सिरे लोड हो रहे हैं…
अभी कोई तब्सिरा नहीं — सबसे पहले अपनी राय दें।