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आह

सभी 40अशआर 0ग़ज़ल 40
ग़ज़ल40
तड़प उठूँ भी तो ज़ालिम तेरी दुहाई न दूँ
تڑپ اٹھوں بھی تو ظالم تری دہائی نہ دوں
नाले का आज दिल से फिर लब तलक गुज़र है
نالے کا آج دل سے پھر لب تلک گزر ہے
आह को समझे हो क्या दिल से अगर हो जाएगी
آہ کو سمجھے ہو کیا دل سے اگر ہو جائے گی
शेख़ साहब से रस्म-ओ-राह न की
شیخ صاحب سے رسم و راہ نہ کی
हम हैं मज्रूः माजरा है ये
ہم ہیں مجروح ماجرا ہے یہ
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