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तड़प उठूँ भी तो ज़ालिम तेरी दुहाई न दूँ
تڑپ اٹھوں بھی تو ظالم تری دہائی نہ دوں
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नाले का आज दिल से फिर लब तलक गुज़र है
نالے کا آج دل سے پھر لب تلک گزر ہے
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आह को समझे हो क्या दिल से अगर हो जाएगी
آہ کو سمجھے ہو کیا دل سے اگر ہو جائے گی
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शेख़ साहब से रस्म-ओ-राह न की
شیخ صاحب سے رسم و راہ نہ کی
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हम हैं मज्रूः माजरा है ये
ہم ہیں مجروح ماجرا ہے یہ
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