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किस को सुनाऊँ हाल-ए-ग़म कोई ग़म-आशना नहीं
کس کو سناؤں حال غم کوئی غم آشنا نہیں
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कभी जब मुद्दतों के बाद उस का सामना होगा
کبھی جب مدتوں کے بعد اس کا سامنا ہوگا
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तुझ से मिल कर तो ये लगता है कि ऐ अजनबी दोस्त
تجھ سے مل کر تو یہ لگتا ہے کہ اے اجنبی دوست
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ज़ब्त कर के हँसी को भूल गया
ضبط کر کے ہنسی کو بھول گیا
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भीड़ में इक अजनबी का सामना अच्छा लगा
بھیڑ میں اک اجنبی کا سامنا اچھا لگا
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