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तड़प उठूँ भी तो ज़ालिम तेरी दुहाई न दूँ
تڑپ اٹھوں بھی تو ظالم تری دہائی نہ دوں
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साये ढलने चराग़ जलने लगे
سائے ڈھلنے چراغ جلنے لگے
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अपना ख़ाका लगता हूँ
اپنا خاکہ لگتا ہوں
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वो अक्स मौजा-ए-गुल था चमन चमन में रहा
وہ عکس موجۂ گل تھا چمن چمن میں رہا
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