ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
अंधेरा
सभी
7
अशआर
0
ग़ज़ल
7
ग़ज़ल
7
0
हस्ती अपनी हबाब की सी है
ہستی اپنی حباب کی سی ہے
0
जमेगी कैसे बिसात-ए-यारां कि शीशा-ओ-जाम बुझ गए हैं
جمے گی کیسے بساط یاراں کہ شیشہ و جام بجھ گئے ہیں
0
तेरे होते हुए महफ़िल में जलाते हैं चराग़
تیرے ہوتے ہوئے محفل میں جلاتے ہیں چراغ
0
कितनी सरकश भी हो सरफिरी यह हवा रखना रोशन दिया
کتنی سرکش بھی ہو سرپھری یہ ہوا رکھنا روشن دیا
0
सोज़-ए-ग़म-ए-फ़िराक़ से दिल को बचाए कौन
سوز غم فراق سے دل کو بچائے کون
सभी देखें
कवियों की सूची
कवियों
और जानें