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आँख उठी मोहब्बत ने अंगड़ाई ली
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
آنکھ اٹھی محبت نے انگڑائی لی
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नम हैं पलकें तिरी ऐ मौज-ए-हवा रात के साथ
परवीन शाकिर द्वारा
نم ہیں پلکیں تری اے موج ہوا رات کے ساتھ
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तेरा घर और मेरा जंगल भीगता है साथ साथ
परवीन शाकिर द्वारा
تیرا گھر اور میرا جنگل بھیگتا ہے ساتھ ساتھ
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