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क़ामत को तेरे सर्व-ए-सनोबर नहीं कहा
قامت کو تیرے سرو صنوبر نہیں کہا
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नया इक रिश्ता पैदा क्यों करें हम
نیا اک رشتہ پیدا کیوں کریں ہم
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दिल ने वफ़ा के नाम पर कार-ए-वफ़ा नहीं किया
دل نے وفا کے نام پر کار وفا نہیں کیا
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इक बूँद थी लहू की सर-ए-दार तो गिरी
اک بوند تھی لہو کی سر دار تو گری
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हम तेरा हिज्र मनाने के लिए निकले हैं
ہم ترا ہجر منانے کے لیے نکلے ہیں
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