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चमन में गुल ने जो कल दावा-ए-जमाल किया
چمن میں گل نے جو کل دعوی جمال کیا
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फिर लौटा है ख़ुर्शीद-ए-जहाँ-ताब सफ़र से
پھر لوٹا ہے خورشید جہاں تاب سفر سے
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चलते हो तो चमन को चलिये कहते हैं कि बहारां है
چلتے ہو تو چمن کو چلئے کہتے ہیں کہ بہاراں ہے
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यूं बहार आई है इस बार कि जैसे क़ासिद
یوں بہار آئی ہے اس بار کہ جیسے قاصد
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कुछ मौज-ए-हवा-ए-पेचां ऐ मीर नज़र आई
کچھ موج ہوا پیچاں اے میرؔ نظر آئی
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