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ग़ुरूर-ए-जाँ को मेरे यार बेच देते हैं
غرور جاں کو مرے یار بیچ دیتے ہیں
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पेच रखते हो बहुत साहिबो दस्तार के बीच
پیچ رکھتے ہو بہت صاحبو دستار کے بیچ
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