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यह बे-दिली है तो कश्ती से यार क्या उतरें
अहमद फ़राज़ द्वारा
یہ بے دلی ہے تو کشتی سے یار کیا اتریں
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सारा शहर बिलकता है
अहमद फ़राज़ द्वारा
سارا شہر بلکتا ہے
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दिन नहीं रात नहीं सुब्ह नहीं शाम नहीं
मीर तक़ी मीर द्वारा
دن نہیں رات نہیں صبح نہیں شام نہیں
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जो यह दिल है तो क्या सरंजाम होगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
جو یہ دل ہے تو کیا سرانجام ہوگا
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सूए फ़लक न जानिब-ए-महताब देखना
अहमद फ़राज़ द्वारा
سوئے فلک نہ جانب مہتاب دیکھنا
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न तेरा क़ुर्ब न बादा है क्या क्या जाए
अहमद फ़राज़ द्वारा
نہ تیرا قرب نہ بادہ ہے کیا کیا جائے
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चाक पर चाक हुआ जूँ जूँ सिलाया हम ने
मीर तक़ी मीर द्वारा
چاک پر چاک ہوا جوں جوں سلایا ہم نے
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कोई दम भी मैं कब अंदर रहा हूँ
जौन एलिया द्वारा
کوئی دم بھی میں کب اندر رہا ہوں
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