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मुझ को दयार-ए-ग़ैर में मारा वतन से दूर
مجھ کو دیار غیر میں مارا وطن سے دور
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हम तो जैसे वहाँ के थे ही नहीं
ہم تو جیسے وہاں کے تھے ہی نہیں
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