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जमेगी कैसे बिसात-ए-यारां कि शीशा-ओ-जाम बुझ गए हैं
جمے گی کیسے بساط یاراں کہ شیشہ و جام بجھ گئے ہیں
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मीरؔ दरिया है सुने शेर ज़ुबानी उसकी
میرؔ دریا ہے سنے شعر زبانی اس کی
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आगे जमाल-ए-यार के माज़ूर हो गया
آگے جمال یار کے معذور ہو گیا
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क्या मुवाफ़िक़ हो दवा इश्क़ के बीमार के साथ
کیا موافق ہو دوا عشق کے بیمار کے ساتھ
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हम से कुछ आगे ज़माने में हुआ क्या क्या कुछ
ہم سے کچھ آگے زمانے میں ہوا کیا کیا کچھ
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