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चराग़-ए-सहर
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गिला फ़ुज़ूल था अहद-ए-वफ़ा के होते हुए
گلہ فضول تھا عہد وفا کے ہوتے ہوئے
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मरीज़-ए-मोहब्बत उन्हीं का फ़साना सुनाता रहा दम निकलते निकलते
مریض محبت انہیں کا فسانہ سناتا رہا دم نکلتے نکلتے
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