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अब नहीं सीने में मेरे जाए दाग़
मीर तक़ी मीर द्वारा
اب نہیں سینے میں میرے جائے داغ
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रुख़-ए-निगार से है सोज़-ए-जावेदानी शम्अ
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
رخ نگار سے ہے سوز جاودانی شمع
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कसरत-ए-दाग़ से दिल रश्क-ए-गुलिस्ताँ न हुआ
मीर तक़ी मीर द्वारा
کثرت داغ سے دل رشک گلستاں نہ ہوا
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बेताबियों में तंग हम आए हैं जान से
मीर तक़ी मीर द्वारा
بیتابیوں میں تنگ ہم آئے ہیں جان سے
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सोज़िश-ए-दिल से मुफ़्त गुलते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
سوزش دل سے مفت گلتے ہیں
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दिल इश्क़ का हमेशा हरीफ़-ए-नबर्द था
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل عشق کا ہمیشہ حریف نبرد تھا
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रमक़ एक जान वबाल है कोई दम जो है तो अज़ाब है
मीर तक़ी मीर द्वारा
رمق ایک جان وبال ہے کوئی دم جو ہے تو عذاب ہے
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कहीं पहुँचो भी मुझ बे-पा-ओ-सर तक
मीर तक़ी मीर द्वारा
کہیں پہنچو بھی مجھ بے پا و سر تک
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बू कि हो सू-ए-बाग़ निकले है
मीर तक़ी मीर द्वारा
بو کہ ہو سوئے باغ نکلے ہے
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