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उस के कूचे से जो उठ अहल-ए-वफ़ा जाते हैं
اس کے کوچے سے جو اٹھ اہل وفا جاتے ہیں
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कहते हैं बहार आई गुल फूल निकलते हैं
کہتے ہیں بہار آئی گل پھول نکلتے ہیں
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गुज़रा बना-ए-चर्ख़ से नाला पगाह का
گزرا بنائے چرخ سے نالہ پگاہ کا
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तेरी अबरू ओ तेग़-ए-तेज़ तो हम-दम हैं ये दोनों
تری ابرو و تیغ تیز تو ہم دم ہیں یہ دونوں
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गुज़राँ हैं गुज़रते रहते हैं
گزراں ہیں گزرتے رہتے ہیں
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