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कल बारे हम से उस से मुलाक़ात हो गई
मीर तक़ी मीर द्वारा
کل بارے ہم سے اس سے ملاقات ہو گئی
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जब कभी ख़ूबी-ए-क़िस्मत से तुझे देखते हैं
परवीन शाकिर द्वारा
جب کبھی خوبیٔ قسمت سے تجھے دیکھتے ہیں
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जिस सम्त भी देखूँ नज़र आता है कि तुम हो
अहमद फ़राज़ द्वारा
جس سمت بھی دیکھوں نظر آتا ہے کہ تم ہو
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जग में आ कर इधर उधर देखा
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
جگ میں آ کر ادھر ادھر دیکھا
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शहर से यार सवार हुआ जो सवाद में ख़ूब ग़ुबार है आज
मीर तक़ी मीर द्वारा
شہر سے یار سوار ہوا جو سواد میں خوب غبار ہے آج
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छोड़ कर घर बार अपना हसरत-ए-दीदार में
قمر جلالوی द्वारा
چھوڑ کر گھر بار اپنا حسرت دیدار میں
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भेद पाएं तो रह-ए-यार में गुम हो जाएं
अहमद फ़राज़ द्वारा
بھید پائیں تو رہ یار میں گم ہو جائیں
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लाغر इतना हूँ कि गर तू बज़्म में जा दे मुझे
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
لاغر اتنا ہوں کہ گر تو بزم میں جا دے مجھے
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न मंज़िलों को न हम रह-गुज़र को देखते हैं
अहमद फ़राज़ द्वारा
نہ منزلوں کو نہ ہم رہ گزر کو دیکھتے ہیں
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कभी रक़्स-ए-शाम-ए-बहार में उसे देखते
Amjad Islam Amjad द्वारा
کبھی رقص شام بہار میں اسے دیکھتے
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क्या हो गया है गेसु-ए-ख़म-दार को तेरे
जौन एलिया द्वारा
کیا ہو گیا ہے گیسوئے خم دار کو ترے
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क़त्ल-ए-आशिक़ किसी माशूक़ से कुछ दूर न था
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
قتل عاشق کسی معشوق سے کچھ دور نہ تھا
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लाग़र इतना हूँ कि गर तू बज़्म में जा दे मुझे
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
لاغر اتنا ہوں کہ گر تو بزم میں جا دے مجھے
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अपनी रुसवाई तिरे नाम का चर्चा देखूँ
परवीन शाकिर द्वारा
اپنی رسوائی ترے نام کا چرچا دیکھوں
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आवाज़ के हम राह सरापा भी तो देखूँ
परवीन शाकिर द्वारा
آواز کے ہم راہ سراپا بھی تو دیکھوں
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