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गनवाई किस की तमन्ना में ज़िंदगी मैंने
گنوائی کس کی تمنا میں زندگی میں نے
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ये जो हासिल हमें हर शय की फ़रावानी है
یہ جو حاصل ہمیں ہر شے کی فراوانی ہے
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समझना फ़हम गर कुछ है तबीई से इलाही को
سمجھنا فہم گر کچھ ہے طبیعی سے الٰہی کو
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बाग़-ए-जहां के गुल हैं या ख़ार हैं तो हम हैं
باغ جہاں کے گل ہیں یا خار ہیں تو ہم ہیں
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क्या कहिए क्या रखें हैं हम तुझ से यार ख़्वाहिश
کیا کہیے کیا رکھیں ہیں ہم تجھ سے یار خواہش
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