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ग़ज़ल166
गनवाई किस की तमन्ना में ज़िंदगी मैंने
گنوائی کس کی تمنا میں زندگی میں نے
ये जो हासिल हमें हर शय की फ़रावानी है
یہ جو حاصل ہمیں ہر شے کی فراوانی ہے
समझना फ़हम गर कुछ है तबीई से इलाही को
سمجھنا فہم گر کچھ ہے طبیعی سے الٰہی کو
बाग़-ए-जहां के गुल हैं या ख़ार हैं तो हम हैं
باغ جہاں کے گل ہیں یا خار ہیں تو ہم ہیں
क्या कहिए क्या रखें हैं हम तुझ से यार ख़्वाहिश
کیا کہیے کیا رکھیں ہیں ہم تجھ سے یار خواہش
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