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मिसाल-ए-दस्त-ए-ज़ुलैख़ा तपाक चाहता है
مثال دست زلیخا تپاک چاہتا ہے
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सैकड़ों ही रहनुमा हैं रास्ता कोई नहीं
سینکڑوں ہی رہنما ہیں راستہ کوئی نہیں
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ग़ुबार-ए-दश्त-ए-तलब में हैं रफ़्तगाँ क्या क्या
غبار دشت طلب میں ہیں رفتگاں کیا کیا
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हवाएँ लाख चलें लौ सँभलती रहती है
ہوائیں لاکھ چلیں لو سنبھلتی رہتی ہے
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दूरियाँ सिमटने में देर कुछ तो लगती है
دوریاں سمٹنے میں دیر کچھ تو لگتی ہے
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