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नहीं निभाई ख़ुशी से ग़मी को छोड़ दिया
نہیں نباہی خوشی سے غمی کو چھوڑ دیا
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न तो दिल का न जां का दफ़्तर है
نہ تو دل کا نہ جاں کا دفتر ہے
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न कोई हिज्र न कोई विसाल है शायद
نہ کوئی ہجر نہ کوئی وصال ہے شاید
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तोहमत चंद अपने ज़िम्मे धर चले
تہمت چند اپنے ذمے دھر چلے
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शब ख़ुमार-ए-शौक़-ए-साक़ी रस्तख़ेज़ अंदाज़ा था
شب خمار شوق ساقی رستخیز اندازہ تھا
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