ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
फ़लसफ़ा
सभी
166
अशआर
0
ग़ज़ल
166
0
पसंदीदा
पसंदीदा
शेयर करें
क्रम से लगाएं
लोकप्रियता
वर्णानुक्रम
0
मिसाल-ए-दस्त-ए-ज़ुलैख़ा तपाक चाहता है
अहमद फ़राज़ द्वारा
مثال دست زلیخا تپاک چاہتا ہے
0
सैकड़ों ही रहनुमा हैं रास्ता कोई नहीं
Amjad Islam Amjad द्वारा
سینکڑوں ہی رہنما ہیں راستہ کوئی نہیں
0
ग़ुबार-ए-दश्त-ए-तलब में हैं रफ़्तगाँ क्या क्या
Amjad Islam Amjad द्वारा
غبار دشت طلب میں ہیں رفتگاں کیا کیا
0
हवाएँ लाख चलें लौ सँभलती रहती है
Amjad Islam Amjad द्वारा
ہوائیں لاکھ چلیں لو سنبھلتی رہتی ہے
0
दूरियाँ सिमटने में देर कुछ तो लगती है
Amjad Islam Amjad द्वारा
دوریاں سمٹنے میں دیر کچھ تو لگتی ہے
0
निकल के हल्क़ा-ए-शाम-ओ-सहर से जाएँ कहीं
Amjad Islam Amjad द्वारा
نکل کے حلقۂ شام و سحر سے جائیں کہیں
0
शाम ढले जब बस्ती वाले लौट के घर को आते हैं
Amjad Islam Amjad द्वारा
شام ڈھلے جب بستی والے لوٹ کے گھر کو آتے ہیں
0
तेरा ये लुत्फ़ किसी ज़ख़्म का उनवान न हो
Amjad Islam Amjad द्वारा
تیرا یہ لطف کسی زخم کا عنوان نہ ہو
0
दिल साफ़ हो तो जल्वा गह-ए-यार क्यों न हो
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل صاف ہو تو جلوہ گہہ یار کیوں نہ ہو
0
ये मीर सितम कुश्ता किसू वक़्त जवाँ था
मीर तक़ी मीर द्वारा
یہ میرؔ ستم کشتہ کسو وقت جواں تھا
0
जो न नक़्द-ए-दाग़-ए-दिल की करे शोला पासबानी
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
جو نہ نقد داغ دل کی کرے شعلہ پاسبانی
0
जराहत तोहफ़ा, अलमास अरमग़ां, दाग़-ए-जिगर हदिया
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
جراحت تحفہ الماس ارمغاں داغ جگر ہدیہ
0
शब वही लेकिन सितारा और है
परवीन शाकिर द्वारा
شب وہی لیکن ستارہ اور ہے
0
मुझ सोज़ बाद-ए-मर्ग से आगाह कौन है
मीर तक़ी मीर द्वारा
مجھ سوز بعد مرگ سے آگاہ کون ہے
0
दिल में भरा ज़ बसकि ख़याल-ए-शराब था
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل میں بھرا ز بسکہ خیال شراب تھا
0
जाँ गुदाज़ इतनी कहाँ आवाज़ ऊद-ओ-चंग है
मीर तक़ी मीर द्वारा
جاں گداز اتنی کہاں آواز عود و چنگ ہے
0
एक साया मिरा मसीहा था
जौन एलिया द्वारा
ایک سایہ مرا مسیحا تھا
0
ऐ सुब्ह मैं अब कहाँ रहा हूँ
जौन एलिया द्वारा
اے صبح میں اب کہاں رہا ہوں
0
अभी इक शोर सा उठा है कहीं
जौन एलिया द्वारा
ابھی اک شور سا اٹھا ہے کہیں
0
हो का आलम है यहाँ नाला-गरों के होते
जौन एलिया द्वारा
ہو کا عالم ہے یہاں نالہ گروں کے ہوتے
← पिछला
अगला →
कवियों की सूची
कवियों
और जानें