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सभी 37अशआर 0ग़ज़ल 37
ग़ज़ल37
हम हुए तुम हुए कि मीर हुए
ہم ہوئے تم ہوئے کہ میرؔ ہوئے
अमीरों तक रसाई हो चुकी बस
امیروں تک رسائی ہو چکی بس
रहा गर कोई ता क़यामत सलामत
رہا گر کوئی تا قیامت سلامت
तेरे दर से न उठा हूँ न उठूँगा ऐ दोस्त
تیرے در سے نہ اٹھا ہوں نہ اٹھوں گا اے دوست
जग में आ कर इधर उधर देखा
جگ میں آ کر ادھر ادھر دیکھا
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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