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हस्ती अपनी हबाब की सी है
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہستی اپنی حباب کی سی ہے
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मेरी लौ लगी है तुझसे ग़म-ए-ज़िंदगी मिटा दे
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مری لو لگی ہے تجھ سے غم زندگی مٹا دے
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हाँ वही इश्क़-ओ-मोहब्बत की जला होती है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ہاں وہی عشق و محبت کی جلا ہوتی ہے
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राह-ए-दूर-ए-इश्क़ में रोता है क्या
मीर तक़ी मीर द्वारा
راہ دور عشق میں روتا ہے کیا
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जब तक मरे होंटों पे तेरा नाम रहेगा
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
جب تک مرے ہونٹوں پہ ترا نام رہے گا
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हरम है क्या चीज़ देर क्या है किसी पे मेरी नज़र नहीं है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
حرم ہے کیا چیز دیر کیا ہے کسی پہ میری نظر نہیں ہے
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आ जाएँ हम नज़र जो कोई दम बहुत है यां
मीर तक़ी मीर द्वारा
آ جائیں ہم نظر جو کوئی دم بہت ہے یاں
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फ़क़ीराना आए सदा कर चले
मीर तक़ी मीर द्वारा
فقیرانہ آئے صدا کر چلے
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बरंग-ए-बू-ए-गुल इस बाग़ के हम आश्ना होते
मीर तक़ी मीर द्वारा
برنگ بوئے گل اس باغ کے ہم آشنا ہوتے
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आह-ए-सहर ने सोज़िश-ए-दिल को मिटा दिया
मीर तक़ी मीर द्वारा
آہ سحر نے سوزش دل کو مٹا دیا
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मैं कौन हूँ ऐ हम-नफ़सां सोख़्ता जाँ हूँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
میں کون ہوں اے ہم نفساں سوختہ جاں ہوں
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वो बुतों ने डाले हैं वसवसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गया
فیض احمد فیض द्वारा
وہ بتوں نے ڈالے ہیں وسوسے کہ دلوں سے خوف خدا گیا
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देखेगा जो तुझ रू को सो हैरान रहेगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
دیکھے گا جو تجھ رو کو سو حیران رہے گا
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हर घड़ी पेश-ए-नज़र इश्क़ में क्या क्या न रहा
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ہر گھڑی پیش نظر عشق میں کیا کیا نہ رہا
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जो मिटा है तेरे जमाल पर वो हर एक ग़म से गुज़र गया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
جو مٹا ہے تیرے جمال پر وہ ہر ایک غم سے گزر گیا
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बारहा गोर-ए-दिल झंका लाया
मीर तक़ी मीर द्वारा
بارہا گور دل جھنکا لایا
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मुझ को दुनिया के हर इक ग़म से छुड़ा रखा है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مجھ کو دنیا کے ہر اک غم سے چھڑا رکھا ہے
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ग़म-ए-दुनिया ग़म-ए-हस्ती ग़म-ए-उल्फ़त ग़म-ए-दिल
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
غم دنیا غم ہستی غم الفت غم دل
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करते ही नहीं तर्क-ए-बुताँ तौर-ए-जफ़ा का
मीर तक़ी मीर द्वारा
کرتے ہی نہیں ترک بتاں طور جفا کا
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उधर से अब्र उठ कर जो गया है
मीर तक़ी मीर द्वारा
ادھر سے ابر اٹھ کر جو گیا ہے
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