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ग़म-ए-दौरां
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दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
دونوں جہان تیری محبت میں ہار کے
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अब के तजदीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जानाँ
اب کے تجدید وفا کا نہیں امکاں جاناں
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कुछ मुहतसिबों की ख़लवत में कुछ वाइज़ के घर जाती है
کچھ محتسبوں کی خلوت میں کچھ واعظ کے گھر جاتی ہے
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अब जो कोई पूछे भी तो इससे क्या शर्ह-ए-हालात करें
اب جو کوئی پوچھے بھی تو اس سے کیا شرح حالات کریں
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वो बुतों ने डाले हैं वसवसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गया
وہ بتوں نے ڈالے ہیں وسوسے کہ دلوں سے خوف خدا گیا
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