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दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
فیض احمد فیض द्वारा
دونوں جہان تیری محبت میں ہار کے
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अब के तजदीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जानाँ
अहमद फ़राज़ द्वारा
اب کے تجدید وفا کا نہیں امکاں جاناں
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कुछ मुहतसिबों की ख़लवत में कुछ वाइज़ के घर जाती है
فیض احمد فیض द्वारा
کچھ محتسبوں کی خلوت میں کچھ واعظ کے گھر جاتی ہے
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अब जो कोई पूछे भी तो इससे क्या शर्ह-ए-हालात करें
فیض احمد فیض द्वारा
اب جو کوئی پوچھے بھی تو اس سے کیا شرح حالات کریں
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वो बुतों ने डाले हैं वसवसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गया
فیض احمد فیض द्वारा
وہ بتوں نے ڈالے ہیں وسوسے کہ دلوں سے خوف خدا گیا
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न हरीफ़-ए-जाँ न शरीक-ए-ग़म शब-ए-इंतज़ार कोई तो हो
अहमद फ़राज़ द्वारा
نہ حریف جاں نہ شریک غم شب انتظار کوئی تو ہو
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न सह सका जब मुसाफ़तों के अज़ाब सारे
अहमद फ़राज़ द्वारा
نہ سہہ سکا جب مسافتوں کے عذاب سارے
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यह मौसम-ए-गुल गरचह तरब-ख़ेज़ बहुत है
فیض احمد فیض द्वारा
یہ موسم گل گرچہ طرب خیز بہت ہے
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रही न पुख़्तगी आलम में दौर-ए-ख़ामी है
मीर तक़ी मीर द्वारा
رہی نہ پختگی عالم میں دور خامی ہے
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हवा के ज़ोर से पिंदार-ए-बाम-ओ-दर भी गया
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہوا کے زور سے پندار بام و در بھی گیا
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इंक़िलाब एक ख़्वाब है सो है
जौन एलिया द्वारा
انقلاب ایک خواب ہے سو ہے
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