ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
ग़ुर्बत
सभी
9
अशआर
0
ग़ज़ल
9
ग़ज़ल
9
0
दिल जो ज़ेर-ए-ग़ुबार अक्सर था
دل جو زیر غبار اکثر تھا
0
तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं
تمہاری یاد کے جب زخم بھرنے لگتے ہیں
0
कमाल-ए-हुस्न है हुस्न-ए-कमाल से बाहर
کمال حسن ہے حسن کمال سے باہر
0
कली कहते हैं उस का सा दहन है
کلی کہتے ہیں اس کا سا دہن ہے
0
हर सिम्त परेशां तेरी आमद के क़रीने
ہر سمت پریشاں تری آمد کے قرینے
सभी देखें
कवियों की सूची
कवियों
और जानें