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ग़ुर्बत

सभी 9अशआर 0ग़ज़ल 9
ग़ज़ल9
दिल जो ज़ेर-ए-ग़ुबार अक्सर था
دل جو زیر غبار اکثر تھا
तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं
تمہاری یاد کے جب زخم بھرنے لگتے ہیں
कमाल-ए-हुस्न है हुस्न-ए-कमाल से बाहर
کمال حسن ہے حسن کمال سے باہر
कली कहते हैं उस का सा दहन है
کلی کہتے ہیں اس کا سا دہن ہے
हर सिम्त परेशां तेरी आमद के क़रीने
ہر سمت پریشاں تری آمد کے قرینے
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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