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दिल-ओ-दिमाग़ है अब किस को ज़िंदगानी का
دل و دماغ ہے اب کس کو زندگانی کا
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हर जज़्र-ओ-मद से दस्त-ओ-बग़ल उठते हैं ख़रोश
ہر جزر و مد سے دست و بغل اٹھتے ہیں خروش
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क़रार दिल का ये काहे को ढंग था आगे
قرار دل کا یہ کاہے کو ڈھنگ تھا آگے
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नश्शा-ए-शौक़ रंग में तुझ से जुदाई की गई
نشۂ شوق رنگ میں تجھ سے جدائی کی گئی
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ज़ख़्म-ए-उम्मीद भर गया कब का
زخم امید بھر گیا کب کا
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