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ज़िंदगी से यही गिला है मुझे
زندگی سے یہی گلہ ہے مجھے
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हम अपने आँसुओं का अफ़साना क्या सुनाएँ
ہم اپنے آنسوؤں کا افسانہ کیا سنائیں
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फिर उसी रहगुज़र पर शायद
پھر اسی رہ گزار پر شاید
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गुफ़्तगू अच्छी लगी ज़ौक़-ए-नज़र अच्छा लगा
گفتگو اچھی لگی ذوق نظر اچھا لگا
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न मंज़िलों को न हम रह-गुज़र को देखते हैं
نہ منزلوں کو نہ ہم رہ گزر کو دیکھتے ہیں
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