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सदियाँ जिन में ज़िंदा हूँ वो सच भी मरने लगते हैं
Amjad Islam Amjad द्वारा
صدیاں جن میں زندہ ہوں وہ سچ بھی مرنے لگتے ہیں
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आज भी तिश्नगी की क़िस्मत में
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