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ज़िंदगी से यही गिला है मुझे
زندگی سے یہی گلہ ہے مجھے
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तड़प उठूँ भी तो ज़ालिम तेरी दुहाई न दूँ
تڑپ اٹھوں بھی تو ظالم تری دہائی نہ دوں
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हम तो यूँ ख़ुश थे कि इक तार-ए-गरेबाँ में है
ہم تو یوں خوش تھے کہ اک تار گریبان میں ہے
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ग़नीम से भी अदावत में हद नहीं मांगी
غنیم سے بھی عداوت میں حد نہیں مانگی
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