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न देर में न हरम में जबीं झुकी होगी
نہ دیر میں نہ حرم میں جبیں جھکی ہوگی
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हुस्न मरहून जोश-ए-बादः-ए-नाज़
حسن مرہون جوش بادۂ ناز
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उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया
الٹی ہو گئیں سب تدبیریں کچھ نہ دوا نے کام کیا
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फ़क़ीराना आए सदा कर चले
فقیرانہ آئے صدا کر چلے
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अब तसव्वुर में हरम है न सनम ख़ाना है
اب تصور میں حرم ہے نہ صنم خانہ ہے
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