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न देर में न हरम में जबीं झुकी होगी
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
نہ دیر میں نہ حرم میں جبیں جھکی ہوگی
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हुस्न मरहून जोश-ए-बादः-ए-नाज़
فیض احمد فیض द्वारा
حسن مرہون جوش بادۂ ناز
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उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया
मीर तक़ी मीर द्वारा
الٹی ہو گئیں سب تدبیریں کچھ نہ دوا نے کام کیا
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फ़क़ीराना आए सदा कर चले
मीर तक़ी मीर द्वारा
فقیرانہ آئے صدا کر چلے
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अब तसव्वुर में हरम है न सनम ख़ाना है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اب تصور میں حرم ہے نہ صنم خانہ ہے
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तरे ग़म को जां की तलाश थी तरे जां-निसार चले गए
فیض احمد فیض द्वारा
ترے غم کو جاں کی تلاش تھی ترے جاں نثار چلے گئے
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ऐ सनम तू सनम है निराला
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اے صنم تو صنم ہے نرالا
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निकले है चश्मा जो कोई जोश-ए-ज़नां पानी का
मीर तक़ी मीर द्वारा
نکلے ہے چشمہ جو کوئی جوش زناں پانی کا
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कब याद में तेरा साथ नहीं कब हात में तेरा हात नहीं
فیض احمد فیض द्वारा
کب یاد میں تیرا ساتھ نہیں کب ہات میں تیرا ہات نہیں
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फिर हरीफ़-ए-बहार हो बैठे
فیض احمد فیض द्वारा
پھر حریفِ بہار ہو بیٹھے
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मक़ाम-ए-होश से गुज़रा मकाँ से ला-मकाँ पहुँचा
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مقام ہوش سے گزرا مکاں سے لا مکاں پہنچا
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मुझ को तुझ से जो कुछ मोहब्बत है
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
مجھ کو تجھ سے جو کچھ محبت ہے
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