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ख़याल-ए-यार
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कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी
کچھ تو ہوا بھی سرد تھی کچھ تھا ترا خیال بھی
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भेद पाएं तो रह-ए-यार में गुम हो जाएं
بھید پائیں تو رہ یار میں گم ہو جائیں
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न मंज़िलों को न हम रह-गुज़र को देखते हैं
نہ منزلوں کو نہ ہم رہ گزر کو دیکھتے ہیں
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तेरी ख़ुशबू का पता करती है
تیری خوشبو کا پتا کرتی ہے
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