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ये ग़म क्या दिल की आदत है, नहीं तो
یہ غم کیا دل کی عادت ہے نہیں تو
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अपने सब यार काम कर रहे हैं
اپنے سب یار کام کر رہے ہیں
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है फ़सीलें उठा रहा मुझ में
ہے فصیلیں اٹھا رہا مجھ میں
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गनवाई किस की तमन्ना में ज़िंदगी मैंने
گنوائی کس کی تمنا میں زندگی میں نے
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ऐश उम्मीद ही से ख़तरा है
عیش امید ہی سے خطرہ ہے
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