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शहर से यार सवार हुआ जो सवाद में ख़ूब ग़ुबार है आज
شہر سے یار سوار ہوا جو سواد میں خوب غبار ہے آج
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रुकी हुई है अभी तक बहार आँखों में
رکی ہوئی ہے ابھی تک بہار آنکھوں میں
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नक़्क़ाश देख तो मैं क्या नक़्श-ए-यार खेंचा
نقاش دیکھ تو میں کیا نقش یار کھینچا
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