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ऐसा है कि सब ख़्वाब मुसलसल नहीं होते
अहमद फ़राज़ द्वारा
ایسا ہے کہ سب خواب مسلسل نہیں ہوتے
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अब किसी से मिरा हिसाब नहीं
जौन एलिया द्वारा
اب کسی سے مرا حساب نہیں
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बजा कि आँख में नींदों के सिलसिले भी नहीं
परवीन शाकिर द्वारा
بجا کہ آنکھ میں نیندوں کے سلسلے بھی نہیں
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