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मयकश

सभी 4अशआर 0ग़ज़ल 4
ग़ज़ल4
हस्ती अपनी हबाब की सी है
ہستی اپنی حباب کی سی ہے
जब तक मिरी निगाह में तेरा जमाल है
جب تک مری نگاہ میں تیرا جمال ہے
यारो मुझे माफ़ रखो मैं नशे में हूँ
یارو مجھے معاف رکھو میں نشے میں ہوں
आज यूं मौज दर मौज ग़म थम गया
آج یوں موج در موج غم تھم گیا
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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