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मौत

सभी 26अशआर 0ग़ज़ल 26
ग़ज़ल26
कब तलक जी रुके ख़फ़ा होवे
کب تلک جی رکے خفا ہووے
समझे थे मीरؔ हम कि यह नासूर कम हुआ
سمجھے تھے میرؔ ہم کہ یہ ناسور کم ہوا
नई तर्ज़ों से मयख़ाने में रंग-ए-मय झलकता था
نئی طرزوں سے میخانے میں رنگ مے جھلکتا تھا
ज़िंदगी क्या है इक कहानी है
زندگی کیا ہے اک کہانی ہے
शौक़ है तो है उस का घर नज़दीक
شوق ہے تو ہے اس کا گھر نزدیک
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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