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नाला

सभी 12अशआर 0ग़ज़ल 12
ग़ज़ल12
हैं बाद मिरे मर्ग के आसार से अब तक
ہیں بعد مرے مرگ کے آثار سے اب تک
हम भी फिरते हैं यक हशम ले कर
ہم بھی پھرتے ہیں یک حشم لے کر
छोड़ कर घर बार अपना हसरत-ए-दीदार में
چھوڑ کر گھر بار اپنا حسرت دیدار میں
कहना तिरे मुँह पर तो निपट बे-अदबी है
کہنا ترے منہ پر تو نپٹ بے ادبی ہے
फ़िक्र है माह के जो शहर बदर करने की
فکر ہے ماہ کے جو شہر بدر کرنے کی
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