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हैं बाद मिरे मर्ग के आसार से अब तक
ہیں بعد مرے مرگ کے آثار سے اب تک
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हम भी फिरते हैं यक हशम ले कर
ہم بھی پھرتے ہیں یک حشم لے کر
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छोड़ कर घर बार अपना हसरत-ए-दीदार में
چھوڑ کر گھر بار اپنا حسرت دیدار میں
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कहना तिरे मुँह पर तो निपट बे-अदबी है
کہنا ترے منہ پر تو نپٹ بے ادبی ہے
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फ़िक्र है माह के जो शहर बदर करने की
فکر ہے ماہ کے جو شہر بدر کرنے کی
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