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ख़ुश क़दाँ जब सवार होते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
خوش قداں جب سوار ہوتے ہیں
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सब लोग लिए संग-ए-मलामत निकल आए
अहमद फ़राज़ द्वारा
سب لوگ لیے سنگ ملامت نکل آئے
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