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सभी 28अशआर 0ग़ज़ल 28
ग़ज़ल28
हुक्म-ए-सैय्याद है ता ख़त्म-ए-तमाशाए-बहार
حکم صیاد ہے تا ختم تماشائے بہار
मुझे बाग़बां से गिला यह है कि चमन से बे-ख़बरी रही
مجھے باغباں سے گلہ یہ ہے کہ چمن سے بے خبری رہی
अब के भी सैर-ए-बाग़ की जी में हवस रही
اب کے بھی سیر باغ کی جی میں ہوس رہی
ऐ अब्र-ए-तर तू और किसी सिम्त को बरस
اے ابر تر تو اور کسی سمت کو برس
तुझे क्या नासिहा अहबाब खुद समझाए जाते हैं
تجھے کیا ناصحا احباب خود سمجھائے جاتے ہیں
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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